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टीम इशकोल · 25 अक्टूबर 2026
क्या आपका बच्चा एक छोटी-सी कहानी पढ़कर बता सकता है कि उसमें क्या हुआ? यही सवाल निपुण भारत मिशन की जड़ में है, जो बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (FLN) के लिए भारत सरकार का राष्ट्रीय मिशन है। मिशन का लक्ष्य वर्ष 2026-27 अब आ चुका है। ताज़ा राष्ट्रीय आंकड़े बताते हैं कि सुधार हुआ है, लेकिन कक्षा 3 के बहुत-से बच्चे अब भी कक्षा 2 का पाठ आसानी से नहीं पढ़ पाते। अच्छी बात यह है कि माता-पिता और शिक्षक रोज़ सिर्फ़ 15 मिनट देकर बड़ा फ़र्क ला सकते हैं।

निपुण भारत मिशन क्या है?
शिक्षा मंत्रालय ने 5 जुलाई 2021 को निपुण भारत मिशन शुरू किया। NIPUN का पूरा नाम है: National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy, यानी समझ के साथ पढ़ने और संख्या ज्ञान में दक्षता के लिए राष्ट्रीय पहल। शुरुआत में लक्ष्य यह था कि 2026-27 तक हर बच्चा कक्षा 3 के अंत तक बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान हासिल कर ले। इसमें लगभग 3 से 9 साल के बच्चे शामिल हैं। यह मिशन समग्र शिक्षा योजना के तहत चलता है और सभी राज्य व केंद्रशासित प्रदेश इसे लागू कर रहे हैं।
आसान शब्दों में, “बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान” का मतलब है कि बच्चा एक सरल पाठ समझकर पढ़ सके, छोटे वाक्य लिख सके और जोड़-घटाव या थोड़े पैसों का हिसाब जैसा बुनियादी गणित कर सके। स्कूल की बाक़ी सारी पढ़ाई इन्हीं कौशलों पर टिकी है।
कक्षा 2 या कक्षा 3? एक छोटा पर अहम बदलाव
29 जुलाई 2026 को राज्यसभा में दिए गए जवाब में मंत्रालय ने मिशन का लक्ष्य “कक्षा 2 के अंत तक” FLN बताया है, और सीखने के लक्ष्य बालवाटिका (प्री-स्कूल) से कक्षा 2 तक रखे गए हैं। यह NEP 2020 की 5+3+3+4 संरचना से मेल खाता है, जिसमें बुनियादी चरण यानी तीन साल प्री-स्कूल और कक्षा 1 व 2 आते हैं। माता-पिता के लिए संदेश साफ़ है: शुरुआती साल सबसे ज़्यादा मायने रखते हैं, और कक्षा 3 तक बच्चे को “पढ़ना सीखने” से आगे बढ़कर “पढ़कर सीखने” लगना चाहिए।
निपुण भारत लक्ष्य: बच्चा क्या-क्या कर पाए?
निपुण भारत में साफ़ लक्ष्य तय किए गए हैं, जिन्हें लक्ष्य सूची कहा जाता है, ताकि माता-पिता और समुदाय भी प्रगति देख सकें। 2021 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार कक्षा 2 का बच्चा एक मिनट में 45 से 60 शब्द और कक्षा 3 का बच्चा कम से कम 60 शब्द समझ के साथ पढ़ सके। सिर्फ़ रफ़्तार लक्ष्य नहीं है: बच्चे को जो पढ़ा, वह समझ भी आना चाहिए।
मिशन यह भी कहता है कि बच्चे की प्रगति एक समग्र प्रगति कार्ड (होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड) में दर्ज हो, जिसमें सिर्फ़ पढ़ने और गणित के अंक नहीं, बल्कि शारीरिक, सामाजिक-भावनात्मक और जीवन कौशल भी शामिल हों।
क्या बच्चे कक्षा 3 तक पढ़ पा रहे हैं? आंकड़े क्या कहते हैं
दो बड़े सर्वे सबसे साफ़ तस्वीर देते हैं। दोनों के तरीक़े अलग हैं, इसलिए इनके आंकड़ों की सीधी तुलना नहीं करनी चाहिए।
ASER 2024 (ग्रामीण भारत)
ASER 2024 के राष्ट्रीय नतीजों में 605 ग्रामीण ज़िलों के 6,49,491 बच्चों को शामिल किया गया। सरकारी स्कूलों में कक्षा 3 के जो बच्चे कक्षा 2 स्तर का पाठ पढ़ सके, उनका हिस्सा 2022 के 16.3% से बढ़कर 2024 में 23.4% हो गया, जो 2018 के 20.9% से भी ज़्यादा है। गणित में, 2024 में ग्रामीण स्कूलों के कक्षा 3 के 33.7% बच्चे कम से कम दो अंकों का घटाव कर सके, जबकि 2022 में यह 25.9% था।
यह 2018 के बाद के तीनों सर्वे दौर में सबसे ऊंचा स्तर है। फिर भी इसका मतलब है कि ग्रामीण सरकारी स्कूलों में कक्षा 3 के लगभग हर चार में से तीन बच्चे अभी कक्षा 2 स्तर का पाठ नहीं पढ़ पा रहे थे। ASER ने यह भी पाया कि 80% से ज़्यादा स्कूलों को FLN गतिविधियां चलाने का सरकारी निर्देश मिला था, और 75% से ज़्यादा स्कूलों ने कक्षा 1 से पहले स्कूल-तैयारी कार्यक्रम चलाया।
परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024 (सभी स्कूल)
NCERT के तहत राष्ट्रीय आकलन केंद्र परख ने 4 दिसंबर 2024 को 781 ज़िलों के 74,000 से ज़्यादा स्कूलों में लगभग 21 लाख विद्यार्थियों का आकलन किया। कक्षा 3 में भाषा में लड़कियों का औसत 65% और लड़कों का 63% रहा, जबकि गणित में दोनों का औसत 60% रहा। इसके बाद परख ने कक्षा 3 पर केंद्रित एक अलग फ़ाउंडेशनल लर्निंग स्टडी शुरू की है, जो अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार 10,000 से ज़्यादा स्कूलों के एक लाख से ज़्यादा बच्चों को 20 भाषाओं में, चरणों में कवर कर रही है। इस लेख के लिखे जाने तक इसके नतीजे सार्वजनिक नहीं हुए थे।
बुनियादी शिक्षा पर कौन और कैसे काम कर रहा है?
- शिक्षा मंत्रालय: समग्र शिक्षा के ज़रिए राज्यों को पैसा देता है। 2026-27 में निपुण भारत के लिए आवंटन लगभग ₹4,196 करोड़ (₹4,19,572.53 लाख) है।
- NCERT: कक्षा 1 के लिए तीन महीने का खेल-आधारित स्कूल-तैयारी मॉड्यूल विद्या प्रवेश बनाया, जिसका लाभ 2022-23 से 8.8 लाख स्कूलों के 5 करोड़ से ज़्यादा बच्चों को मिला है। इसने 3 से 6 साल के बच्चों के लिए 53 खेल-आधारित सामग्रियों वाला जादुई पिटारा भी बनाया, जिसका 22 भाषाओं में अनुवाद हुआ है, और 121 स्थानीय भाषाओं में प्राइमर तैयार किए।
- शिक्षक: DIKSHA पर FLN और प्रारंभिक बाल शिक्षा पर NISHTHA ऑनलाइन प्रशिक्षण 15.57 लाख से ज़्यादा उपयोगकर्ताओं ने पूरा किया है। DIKSHA पर 133 भाषाओं में सामग्री उपलब्ध है।
- नागरिक समाज: ASER सेंटर नागरिकों की मदद से ASER सर्वे करता है, ताकि देश देख सके कि बच्चे असल में कितना सीख रहे हैं।
- परिवार और समुदाय: मिशन के लक्ष्य इस तरह लिखे गए हैं कि माता-पिता भी उन्हें समझ सकें। आप भी इस मिशन का हिस्सा हैं।
माता-पिता घर पर क्या करें (रोज़ 15 मिनट)
इसके लिए शिक्षक होना या अच्छी अंग्रेज़ी बोलना ज़रूरी नहीं। वही भाषा इस्तेमाल करें जो बच्चा घर पर बोलता है। यूनिसेफ़ के अनुसार रोज़ 10 से 15 मिनट किताब के साथ बिताना भी बच्चे में पढ़ने की रुचि जगा सकता है।
- रोज़ ज़ोर से पढ़कर सुनाएं। सोने से पहले का समय सबसे अच्छा है। किरदारों के लिए आवाज़ बदलें और चित्रों पर बात करें।
- बारी-बारी पढ़ें। एक पंक्ति आप पढ़ें, अगली बच्चा। धीरे-धीरे शब्दों से वाक्यों और फिर पन्नों तक बढ़ें।
- “क्यों” और “आगे क्या” पूछें। कहानी के बाद पूछें: क्या हुआ? उसने ऐसा क्यों किया? तुम क्या करते? इससे सिर्फ़ रफ़्तार नहीं, समझ बढ़ती है।
- गणित को रोज़ की ज़िंदगी में लाएं। रोटियां गिनें, बाज़ार में दाम की तुलना करें, बच्चे से ₹20 देकर बाक़ी पैसे गिनवाएं, खाना बनाते समय नाप-तौल करवाएं।
- अक्षरों और ध्वनियों से खेलें। साइनबोर्ड पर अक्षर ढूंढें, “ऐसी चीज़ बताओ जो म से शुरू हो” खेलें और कविताएं गाएं।
- मुफ़्त सरकारी संसाधनों का उपयोग करें। NCERT का ई-जादुई पिटारा ऐप, WhatsApp और Telegram बॉट और टोल-फ़्री नंबर (1800 212 0173) के ज़रिए रोज़ की कहानी, गीत और सवाल देता है।
- बच्चे को आपको पढ़ते हुए देखने दें। अख़बार, रेसिपी, कोई धार्मिक किताब: सब गिना जाता है। पढ़ने के समय फ़ोन और टीवी बंद रखें।
- शिक्षक से बात करें। पूछें कि कक्षा के सीखने के लक्ष्यों के हिसाब से बच्चा कहां है और घर पर किस चीज़ का अभ्यास कराएं।
अभ्यास के लिए हमारी गाइड घर पर वर्कशीट का इस्तेमाल कैसे करें देखें। अगर नियमित अभ्यास के बाद भी बच्चे को पढ़ने में असामान्य रूप से कठिनाई होती लगे, तो कक्षा शिक्षक से और ज़रूरत हो तो बाल रोग विशेषज्ञ या बाल विकास विशेषज्ञ से सलाह लें।
शिक्षक कक्षा में क्या करें
- अंदाज़ा नहीं, जांच करें। सत्र की शुरुआत में हर बच्चे की छोटी-सी पढ़ने की जांच (अक्षर, शब्द, अनुच्छेद, कहानी) से पता चलता है कि वह कहां है।
- दिन के कुछ हिस्से में स्तर के हिसाब से समूह बनाएं। हर समूह को उसके स्तर का अभ्यास देने से पीछे रह गए बच्चों को मदद मिलती है, बजाय इसके कि सिर्फ़ किताब के हिसाब से पढ़ाया जाए।
- घर की भाषा से शुरू करें। मातृभाषा के प्राइमर इस्तेमाल करें और धीरे-धीरे हिंदी या अंग्रेज़ी की ओर बढ़ें।
- पहले खेल। विद्या प्रवेश और जादुई पिटारा की गतिविधियां अपनाएं: कठपुतली, खेल, कविताएं और कहानियां।
- माता-पिता को साथ लें। अभिभावक-शिक्षक बैठक में लक्ष्य सूची साझा करें और हर हफ़्ते घर के लिए 15 मिनट की एक गतिविधि सुझाएं।
बड़े बच्चे भी ये आदतें बना सकते हैं। पढ़ें: स्कूली बच्चों के लिए 7 अच्छी पढ़ाई की आदतें (अंग्रेज़ी में)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: निपुण भारत मिशन
निपुण भारत का पूरा नाम क्या है?
National Initiative for Proficiency in Reading with Understanding and Numeracy। इसे शिक्षा मंत्रालय ने 5 जुलाई 2021 को शुरू किया था।
निपुण भारत में पढ़ने का लक्ष्य क्या है?
शुरुआती लक्ष्यों के अनुसार कक्षा 2 का बच्चा एक मिनट में 45 से 60 शब्द और कक्षा 3 का बच्चा कम से कम 60 शब्द समझ के साथ पढ़ सके।
निपुण भारत का लक्ष्य कक्षा 2 तक है या कक्षा 3 तक?
2021 में शुरुआत के समय लक्ष्य 2026-27 तक “कक्षा 3 के अंत तक” था। जुलाई 2026 में संसद को दिए जवाब में मंत्रालय ने इसे “कक्षा 2 के अंत तक” बताया है, और लक्ष्य बालवाटिका से कक्षा 2 तक हैं।
कैसे जानें कि मेरा बच्चा सही राह पर है?
बच्चे से पिछली कक्षा की किताब का एक छोटा अनुच्छेद ज़ोर से पढ़वाएं और फिर पूछें कि उसमें क्या था। दो अंकों का एक आसान घटाव करवाएं। अगर इनमें से कुछ भी मुश्किल लगे, तो रोज़ अभ्यास कराएं और शिक्षक से बात करें।
क्या बुनियादी पढ़ाई के लिए मुफ़्त संसाधन हैं?
हां। NCERT का ई-जादुई पिटारा और DIKSHA प्लेटफ़ॉर्म कई भारतीय भाषाओं में मुफ़्त कहानियां, गीत और गतिविधियां देते हैं।
स्रोत
- PIB, शिक्षा मंत्रालय: निपुण भारत कार्यक्रम का शुभारंभ (5 जुलाई 2021)
- PIB, शिक्षा मंत्रालय: निपुण भारत मिशन और बुनियादी साक्षरता व संख्या ज्ञान, राज्यसभा उत्तर (29 जुलाई 2026)
- ASER सेंटर: ASER 2024 राष्ट्रीय निष्कर्ष
- परख, NCERT: परख राष्ट्रीय सर्वेक्षण 2024
- Careers360: परख फ़ाउंडेशनल लर्निंग स्टडी 2026 (7 अप्रैल 2026)
- NCERT: ई-जादुई पिटारा
- UNICEF: बच्चे में पढ़ने का प्यार कैसे जगाएं (अंग्रेज़ी)
क्या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा आत्मविश्वास से पढ़ना और सोचना सीखे? इशकोल स्मार्ट किड्स और माता-पिता के लिए हमारे संसाधन देखें, या नजफ़गढ़ (नई दिल्ली) और पोर्ट ब्लेयर में हमारे केंद्रों पर आएं।


