Exam answer sheet and question paper with a pencil on an empty classroom desk, ready for a board exam

CBSE 10वीं दो बार बोर्ड परीक्षा: 2027 के नियम और तैयारी

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टीम इश्कोल · 1 नवंबर 2026

क्या आपका बच्चा इस साल 10वीं कक्षा में है? तो CBSE 10वीं दो बार बोर्ड परीक्षा के बारे में सबसे ज़रूरी बात यह है: फरवरी वाली पहली परीक्षा हर छात्र के लिए अनिवार्य है, और मई वाली दूसरी परीक्षा वैकल्पिक है, जिसमें तीन मुख्य विषयों तक में अंक सुधारे जा सकते हैं। दोनों में से जो बेहतर अंक होंगे, वही गिने जाएंगे। यह व्यवस्था 2026 में पहली बार लागू हुई और 2027 की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस लेख में हम नियम, पहले साल के नतीजे, और बिना तनाव बढ़ाए इस दूसरे मौके का सही इस्तेमाल करने के तरीके समझेंगे।

खाली कक्षा की डेस्क पर पेंसिल के साथ रखी उत्तर पुस्तिका और प्रश्न-पत्र: CBSE बोर्ड परीक्षा
फोटो: Andy Barbour / Pexels (मुफ्त उपयोग)।

CBSE अब 10वीं की बोर्ड परीक्षा दो बार क्यों करा रहा है?

यह विचार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 से आया है। नीति के पैराग्राफ 4.37 में कहा गया है कि बोर्ड परीक्षाओं को “आसान” बनाया जाएगा, और उनके “हाई स्टेक्स” यानी सब कुछ एक ही परीक्षा पर टिके होने वाले दबाव को कम करने के लिए छात्रों को एक स्कूल वर्ष में दो बार तक बोर्ड परीक्षा देने का मौका मिलेगा: एक मुख्य परीक्षा और एक सुधार के लिए, अगर छात्र चाहे। CBSE ने इसी पैराग्राफ का हवाला अपनी ड्राफ्ट योजना (25 फरवरी 2025) में दिया था, जिसे जनता की राय के लिए जारी किया गया था।

जून 2025 में CBSE ने 2026 से 10वीं के लिए यह योजना मंज़ूर कर दी। PTI की 25 जून 2025 की रिपोर्ट के अनुसार पहला चरण फरवरी में और दूसरा मई में होगा, और नतीजे क्रमशः अप्रैल और जून में आएंगे। हालांकि 2026 में दूसरी परीक्षा का परिणाम जुलाई में आया (इसके बारे में नीचे पढ़ें)।

CBSE दो बार बोर्ड परीक्षा: माता-पिता के लिए मुख्य नियम

नीचे दी गई जानकारी CBSE की 14 फरवरी 2026 की आधिकारिक अधिसूचना और 18 जुलाई 2026 की प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित है।

  • पहली परीक्षा (फरवरी) अनिवार्य है। CBSE के अनुसार सभी छात्रों के लिए पहली बोर्ड परीक्षा में बैठना ज़रूरी है।
  • दूसरी परीक्षा (मई) वैकल्पिक है। पास हो चुका छात्र विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं में से अधिकतम तीन विषयों में अपना प्रदर्शन सुधारने के लिए इसमें बैठ सकता है।
  • बेहतर अंक गिने जाते हैं। नियमित छात्रों के लिए दोनों में से बेहतर प्रदर्शन माना जाता है।
  • यही “कंपार्टमेंट” का मौका भी है। जिन छात्रों को किसी विषय में पास होना है, वे दूसरी परीक्षा में कंपार्टमेंट श्रेणी में बैठते हैं। यानी अब जुलाई में अलग पूरक परीक्षा नहीं होती।
  • पहली परीक्षा छोड़ना भारी पड़ सकता है। जो छात्र पहली परीक्षा में तीन या उससे ज़्यादा विषयों में अनुपस्थित रहता है, वह दूसरी परीक्षा नहीं दे सकता। उसे “एसेंशियल रिपीट” श्रेणी में रखा जाता है और वह अगले साल फरवरी की मुख्य परीक्षा देता है।
  • सिर्फ 10वीं के लिए। अभी तक दो परीक्षाओं की व्यवस्था केवल 10वीं कक्षा के लिए है। हमें 12वीं पर इसे लागू करने वाली कोई CBSE सूचना नहीं मिली।

11वीं में दाखिला और आंतरिक मूल्यांकन का क्या?

मंज़ूर योजना पर PTI की रिपोर्ट के अनुसार आंतरिक मूल्यांकन (इंटरनल असेसमेंट) साल में केवल एक बार होगा, दो बार नहीं। CBSE की ड्राफ्ट योजना में यह भी प्रस्ताव था कि 11वीं में दाखिला पहली परीक्षा के नतीजों के आधार पर हो सकता है, जो डिजिलॉकर में उपलब्ध कराए जाते हैं। यह बात ड्राफ्ट से है, इसलिए अंतिम व्यवस्था अपने बच्चे के स्कूल से ज़रूर पूछें।

पहले साल (2026) में क्या हुआ?

2026 की मुख्य परीक्षा 17 फरवरी से 11 मार्च तक और दूसरी परीक्षा 15 से 21 मई तक हुई। CBSE ने दूसरी परीक्षा के नतीजे 18 जुलाई 2026 को घोषित किए। उसकी प्रेस विज्ञप्ति से साफ पता चलता है कि परिवारों ने इस मौके का कैसे इस्तेमाल किया:

  • दूसरी परीक्षा में 6,63,777 छात्र बैठे (6,64,027 ने पंजीकरण कराया था)।
  • अंक सुधारने के लिए 5,13,955 छात्र बैठे, जिनमें से 3,08,095 (59.95%) ने मुख्य परीक्षा से बेहतर अंक पाए।
  • कंपार्टमेंट श्रेणी में 1,49,822 छात्र बैठे और 78,503 पास हुए (52.40%), जबकि 2025 में यह आंकड़ा 48.68% था।
  • दोनों परीक्षाओं को मिलाकर कुल पास प्रतिशत 96.78% रहा।

इससे दो सबक मिलते हैं। पहला, दूसरा मौका असली है: सुधार की कोशिश करने वाले लगभग दस में से छह छात्रों के अंक बढ़े। दूसरा, लगभग दस में से चार के नहीं बढ़े, यानी मई की परीक्षा एक सुरक्षा जाल है, शॉर्टकट नहीं। सबसे अच्छे नतीजे अब भी फरवरी के लिए नियमित तैयारी से ही आते हैं।

2027 की बोर्ड परीक्षा: अभी क्या स्थिति है?

CBSE की 29 सितंबर 2026 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार स्कूलों ने 2027 की 10वीं और 12वीं परीक्षा के लिए लिस्ट ऑफ कैंडिडेट्स (LOC) भेजना शुरू कर दिया था। Careers360 की रिपोर्ट के मुताबिक पहली परीक्षा का LOC सभी छात्रों के लिए भरा जाता है, जबकि दूसरी परीक्षा का LOC पहली परीक्षा के बाद अलग से भरा जाता है। अक्टूबर 2026 के अंत तक CBSE ने 2027 की डेट शीट जारी नहीं की थी। cbse.gov.in और स्कूल के नोटिस पर नज़र रखें, और LOC में बच्चे का नाम, विषय और जन्मतिथि सही है या नहीं, यह ज़रूर जांच लें।

माता-पिता क्या करें

  1. तैयारी फरवरी के हिसाब से करें, मई के नहीं। पहली परीक्षा को ही असली परीक्षा मानें। दूसरी परीक्षा बैकअप है, और वह भी अधिकतम तीन विषयों के लिए।
  2. अभी से एक आसान मासिक योजना बनाएं। नवंबर से जनवरी: सिलेबस पूरा करें और एक बार दोहराएं। जनवरी: घड़ी लगाकर पूरे प्रश्न-पत्र हल करें। रोज़ थोड़ी पढ़ाई आखिरी समय की रटाई से बेहतर है। आसान आदतों के लिए हमारा लेख पढ़ाई की 7 अच्छी आदतें (अंग्रेज़ी में) देखें।
  3. दूसरी परीक्षा का फैसला नतीजे के बाद, शांति से लें। बच्चे और शिक्षक के साथ बैठें। पूछें: किस विषय में अंक बच्चे की क्षमता से साफ तौर पर कम हैं? क्या तैयारी के लिए पर्याप्त समय है? क्या इसका असर 11वीं के विषय चुनने पर पड़ेगा?
  4. तनाव के संकेत पहचानें। नींद, भूख या मूड में बदलाव, या दोस्तों में रुचि कम होना ध्यान देने लायक है। बात करते रहें, सोने और खाने का समय नियमित रखें, और खेल या शौक के लिए भी थोड़ा समय छोड़ें। अगर चिंता बनी रहे तो स्कूल काउंसलर या डॉक्टर से बात करें।
  5. आधिकारिक हेल्पलाइन का उपयोग करें। 2026 में CBSE ने छात्रों और अभिभावकों के लिए निःशुल्क मनो-सामाजिक परामर्श चलाया, जिसमें हिंदी और अंग्रेज़ी में 24×7 टोल-फ्री नंबर 1800-11-8004 शामिल था (CBSE विज्ञप्ति, 6 जनवरी 2026)। 2027 के परामर्श कार्यक्रम के लिए CBSE की वेबसाइट देखें।
  6. तुलना से बचें। किसी रिश्तेदार या पड़ोसी के बच्चे के अंकों की बात करने से शायद ही मदद मिलती है। मेहनत और प्रगति की तारीफ करें।

शिक्षक क्या करें

  • नियम जल्दी समझाएं, खासकर अभिभावक-शिक्षक बैठक में: पहली परीक्षा अनिवार्य है, और तीन या ज़्यादा विषय छूटने पर दूसरी परीक्षा का रास्ता बंद हो जाता है।
  • प्री-बोर्ड को जांच का ज़रिया बनाएं और विषयवार फीडबैक दें, ताकि परिवार बाद में मई की परीक्षा पर सोच-समझकर फैसला ले सकें।
  • परीक्षा के कौशल सिखाएं, सिर्फ पाठ नहीं: प्रश्न ध्यान से पढ़ना, समय का बंटवारा, और गणित-विज्ञान में साफ स्टेप्स लिखना।
  • बच्चों की भलाई पर नज़र रखें और परेशान छात्रों को स्कूल काउंसलर से जोड़ें।

छोटे भाई-बहनों को भी इसका फायदा मिल सकता है। बोर्ड परीक्षा को आसान बनाने वाली आदतें बहुत पहले, प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ने और गणित की मज़बूत नींव से बनती हैं। हमारा लेख बच्चे को पढ़ना कैसे सिखाएं पढ़ें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल: CBSE 10वीं की दूसरी बोर्ड परीक्षा

क्या CBSE की दूसरी बोर्ड परीक्षा अनिवार्य है?

नहीं। फरवरी की पहली परीक्षा सभी के लिए अनिवार्य है। मई की दूसरी परीक्षा वैकल्पिक है।

दूसरी परीक्षा में कितने विषयों में सुधार हो सकता है?

CBSE की 14 फरवरी 2026 की अधिसूचना के अनुसार विज्ञान, गणित, सामाजिक विज्ञान और भाषाओं में से अधिकतम तीन विषयों में।

दोनों परीक्षा देने पर कौन से अंक गिने जाएंगे?

नियमित छात्रों के लिए CBSE दोनों में से बेहतर प्रदर्शन को गिनता है।

अगर बच्चा पहली बोर्ड परीक्षा छोड़ दे तो?

पहली परीक्षा में तीन या ज़्यादा विषय छोड़ने वाला छात्र दूसरी परीक्षा नहीं दे सकता। उसे “एसेंशियल रिपीट” श्रेणी में रखा जाता है और वह अगले फरवरी की मुख्य परीक्षा देता है।

क्या 12वीं में भी दो बार बोर्ड परीक्षा होगी?

नवंबर 2026 तक नहीं। CBSE की दो परीक्षाओं वाली व्यवस्था केवल 10वीं के लिए है।

स्रोत

बिना तनाव, अनुभवी शिक्षकों के साथ नियमित तैयारी चाहते हैं? इश्कोल पाठशाला और अभिभावकों के लिए हमारे संसाधन देखें, या नजफगढ़ (नई दिल्ली) और पोर्ट ब्लेयर में हमारे केंद्रों पर आएं।

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